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थानाभवन चुनाव: क्या गन्ना बेल्ट में पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा लेंगे बदला या अशरफ अली बचाएंगे किला ?

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बजाज चीनी मिल की चिमनियां, गन्ने के बकाए का गुस्सा और ध्रुवीकरण की पुरानी पिच: थानाभवन 2027 का महा-मुकाबला

राम-राम और आदाब साथियों! बिंदास पोल (Bindaas Poll) की 45 वीआईपी हॉट सीट महा-पड़ताल में आज हम आ पहुंचे हैं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना बेल्ट के उस सबसे चर्चित और संवेदनशील केंद्र में, जहाँ की हार-जीत ने 2022 में लखनऊ के सत्ता गलियारों को हिला दिया था—शामली जिले की थानाभवन विधानसभा (09)

थानाभवन की पहचान पूरे सूबे में योगी सरकार के कद्दावर कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा की कर्मभूमि के रूप में रही है। 2012 और 2017 में लगातार दो बार कमल खिलाने वाले सुरेश राणा को योगी सरकार में गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग जैसा बेहद ताकतवर मंत्रालय दिया गया था।

लेकिन 2022 का विधानसभा चुनाव उनके लिए अप्रत्याशित साबित हुआ। किसान आंदोलन के बाद बने सपा-रालोद (SP-RLD) गठबंधन ने यहाँ से पूर्व विधायक राव अब्दुल वारिस के परिवार के अशरफ अली खान पर दांव खेला। गन्ने के बकाए भुगतान की नाराजगी और जाट-मुस्लिम समीकरण की जमीनी एकता ऐसी बैठी कि कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा को 10,806 वोटों के अंतर से शिकस्त झेलनी पड़ी।

2024 लोकसभा चुनाव के बाद क्या बदला समीकरण?

2024 के लोकसभा चुनाव में रालोद (RLD) के एनडीए (भाजपा गठबंधन) में शामिल होने के बाद पश्चिमी यूपी का समीकरण पूरी तरह बदल चुका है। कैराना लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले थानाभवन में 2024 में सपा की इकरा हसन ने मजबूत पकड़ दिखाई, लेकिन जयंत चौधरी के भाजपा के साथ आने से जाट मतों का झुकाव एनडीए की ओर लौटा।

अब 2027 का विधानसभा चुनाव थानाभवन के लिए सबसे बड़ा सवाल बन चुका है: क्या पूर्व मंत्री सुरेश राणा रालोद-भाजपा गठबंधन के दम पर अपनी सीट वापस छीन पाएंगे, या अशरफ अली खान इंडिया गठबंधन के पीडीए फार्मूले से अपनी जीत बरकरार रखेंगे?

📌 थानाभवन विधानसभा एक नजर में 

  • सीट संख्या व नाम: 09 - थानाभवन (सामान्य)

  • प्रशासनिक स्थिति: थानाभवन ब्लॉक/तहसील, शामली जिला (सहारनपुर मंडल)

  • संसदीय क्षेत्र: कैराना लोकसभा सीट (सांसद: इकरा हसन - सपा)

  • कुल अनुमानित मतदाता: लगभग 3,45,000+

  • वर्तमान विधायक: अशरफ अली खान (राष्ट्रीय लोकदल - RLD)

  • निकटतम प्रतिद्वंद्वी (2022): सुरेश राणा (पूर्व कैबिनेट मंत्री, भारतीय जनता पार्टी)

  • प्रमुख इलाके व बाजार: थानाभवन कस्बा, जलालाबाद, गढ़ी पुख्ता, बाबरी, उन, हिरणवाड़ा

  • प्रमुख पहचान: बजाज हिंदुस्थान चीनी मिल (थानाभवन), ऐतिहासिक सिद्धपीठ शीतला माता मंदिर, प्रसिद्ध जलालाबाद किला

2022 का चुनावी घमासान: जब गन्ना मंत्री को झेलनी पड़ी थी हार

2022 के विधानसभा चुनाव में थानाभवन सीट पर 69.8% का भारी मतदान हुआ था। यह चुनाव पूरी तरह गन्ने के बकाए भुगतान और किसान आंदोलन के प्रभाव की सीधी लड़ाई बन गया था।

प्रत्याशी का नामराजनीतिक दलप्राप्त कुल मतमत प्रतिशत (%)परिणाम / स्थिति
अशरफ अली खानराष्ट्रीय लोकदल (RLD / सपा गठबंधन)1,03,75147.47%10,806 वोटों से विजयी
सुरेश राणाभारतीय जनता पार्टी (BJP)92,94542.53%10,806 वोटों से पराजित
जहीर मलिकबहुजन समाज पार्टी (BSP)18,6558.54%तीसरे स्थान पर रहे
सत्य संयम सैनीभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC)1,4460.66%जमानत जब्त

इस चुनाव का सबसे बड़ा निर्णायक बिंदु यह रहा कि बजाज चीनी मिल पर अरबों रुपये के बकाए भुगतान को लेकर स्थानीय किसानों की नाराजगी को विपक्षी गठबंधन ने सीधे भुनाया, जिससे जाट-मुस्लिम गठजोड़ ने भाजपा को कड़े मुकाबले में पीछे छोड़ दिया।

📊 थानाभवन का चुनावी इतिहास (2007 से 2024 तक)

चुनाव वर्षचुनाव प्रकारविजेता प्रत्याशी (दल)उपविजेता (दल)जीत-हार का अंतरमुख्य चुनावी वजह व सियासी फैक्टर
2007विधानसभाअब्दुल वारिस खान (बसपा)सुरेश राणा (भाजपा)1,854 वोटत्रिकोणीय मुकाबले में वारिस खान ने बेहद करीबी अंतर से जीत दर्ज की।
2012विधानसभासुरेश राणा (भाजपा)अशरफ अली खान (रालोद)265 वोटमात्र 265 वोटों के रोमांचक अंतर से जीतकर सुरेश राणा पहली बार विधायक बने।
2017विधानसभासुरेश राणा (भाजपा)अब्दुल राव वारिस (बसपा)16,817 वोटप्रचंड मोदी लहर और ध्रुवीकरण के दम पर सुरेश राणा ने बड़ी जीत दर्ज की।
2022विधानसभाअशरफ अली खान (रालोद)सुरेश राणा (भाजपा)10,806 वोटकिसान आंदोलन और गन्ना बकाए की नाराजगी में कैबिनेट मंत्री की हार।
2024लोकसभा (थानाभवन)इकरा हसन (सपा - इंडिया)प्रदीप चौधरी (भाजपा - NDA)सपा को 14K+ लीडइकरा हसन की जीत में थानाभवन के मुस्लिम और दलित मतों ने बढ़त दिलाई।

2024 लोकसभा चुनाव: थानाभवन ने क्या संदेश दिया?

2024 के लोकसभा चुनाव में कैराना सीट से सपा प्रत्याशी इकरा हसन की ऐतिहासिक जीत में थानाभवन विधानसभा सेगमेंट का बड़ा योगदान रहा।

थानाभवन और जलालाबाद के मुस्लिम बहुल कस्बों में इंडिया गठबंधन को बंपर वोटिंग का लाभ मिला। साथ ही दलित (जाटव) बस्तियों में भी विपक्षी रुझान देखा गया। इस विधानसभा सेगमेंट से सपा को लगभग 14,000 वोटों की बढ़त मिली।

हालाँकि, 2022 के मुकाबले 2024 में बड़ा बदलाव यह आया कि जयंत चौधरी के एनडीए में शामिल होने के कारण ग्रामीण जाट बाहुल्य बूथों पर भाजपा को राहत मिली। 2027 के चुनाव में यही नया समीकरण सबसे बड़ा निर्णायक फैक्टर साबित होने जा रहा है।

जाति-बिरादरी का जमीनी ताना-बाना: किसका कितना जोर?

थानाभवन विधानसभा क्षेत्र में लगभग 3.45 लाख मतदाता हैं। यहाँ का सामाजिक समीकरण त्रिकोणीय जातीय संतुलन पर टिका है:

  • मुस्लिम मतदाता: लगभग 1,15,000 - 1,20,000 मतदाता (सीट का सबसे बड़ा और निर्णायक वर्ग, कुल आबादी का करीब 34% से 35%। इसमें रांगड़ (मुस्लिम राजपूत), अंसारी, तेली और कुरैशी बिरादरी विपक्ष का मुख्य आधार है)।

  • जाट मतदाता: लगभग 50,000 मतदाता (बाबरी और ग्रामीण चौकियों में फैला बेहद संगठित और मुखर वर्ग; रालोद के एनडीए में जाने के बाद यह वोट बैंक काफी हद तक भाजपा के पक्ष में मुड़ सकता है)।

  • सैनी समाज: लगभग 35,000 मतदाता (थानाभवन में सैनी बिरादरी की बड़ी आबादी है, जो पारंपरिक रूप से भाजपा का मजबूत गैर-यादव पिछड़ा आधार है)।

  • दलित समाज (जाटव / वाल्मीकि): लगभग 45,000 मतदाता (ग्रामीण क्षेत्रों में, जो बसपा के कमजोर पड़ने के बाद अब इंडिया गठबंधन की ओर झुका है)।

  • कश्यप / धीमर समाज: लगभग 30,000 मतदाता (अति-पिछड़ा वर्ग, जो भाजपा की कल्याणकारी योजनाओं से मजबूती से जुड़ा है)।

  • ठाकुर (राजपूत) समाज: लगभग 28,000 मतदाता (सुरेश राणा का अपना सजातीय और सबसे समर्पित कोर वोटबैंक)।

  • ब्राह्मण व वैश्य समाज: लगभग 25,000 मतदाता (कस्बों और बाजारों में भाजपा का प्रतिबद्ध कैडर)।

2027 के 4 सबसे बड़े जमीनी मुद्दे: थानाभवन की जनता का सवाल

  • बजाज चीनी मिल का अरबों का गन्ना बकाया: थानाभवन का सबसे बड़ा नासूर स्थानीय बजाज हिंदुस्थान शुगर मिल द्वारा समय पर भुगतान न करना है। पेराई सत्र समाप्त होने के महीनों बाद तक किसानों का पैसा अटका रहता है, जिसे लेकर हर चुनाव में किसानों में भारी आक्रोश रहता है।

  • सड़कों की जर्जर हालत और ओवरलोड वाहनों से जाम: थानाभवन-जलालाबाद और बाबरी संपर्क मार्गों पर गन्ना लदे ट्रकों और ओवरलोड वाहनों के कारण सड़कें खस्ताहाल हैं। जलभराव और गड्ढों से कस्बाई व्यापारी परेशान हैं।

  • बाबरी और जलालाबाद में जलभराव व ड्रेनेज का अभाव: ऐतिहासिक जलालाबाद और बाबरी कस्बों में बारिश के दिनों में गंदा पानी गलियों और घरों में घुस जाता है। सीवर और पक्के नालों की कोई व्यवस्था नहीं है।

  • उच्च शिक्षा और कन्या डिग्री कॉलेज की कमी: ग्रामीण छात्राओं के लिए इलाके में एक सरकारी डिग्री कॉलेज और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आधुनिक ट्रॉमा सेंटर की मांग दशकों से अधूरी है।

सुरेश राणा (BJP) की ताकत और कमजोरियां

ताकत:

  • रालोद (RLD) और भाजपा का नया गठबंधन: जयंत चौधरी के एनडीए में होने के कारण 50 हजार जाट मतदाताओं का भाजपा के साथ सीधा जुड़ाव, जो 2022 में विपक्ष के साथ था।

  • ठाकुर + सैनी + कश्यप + सवर्ण का अटूट 1.4 लाख का ब्लॉक: यदि भाजपा अपने पारंपरिक ओबीसी और सवर्ण वोटों को एकजुट रखती है, तो यह मजबूत चुनावी दीवार बन जाती है।

  • योगी सरकार के शीर्ष नेतृत्व से सीधा संपर्क: पूर्व कैबिनेट मंत्री होने के नाते मजबूत राजनीतिक रसूख और आक्रामक चुनावी प्रबंधन।

कमजोरियां:

  • गन्ना भुगतान का स्थायी ठप्पा: पूर्व गन्ना मंत्री रहने के बावजूद अपनी ही विधानसभा की बजाज मिल का भुगतान समय पर न करा पाने का विपक्षी नैरेटिव।

  • मुस्लिम मतदाताओं में ध्रुवीकरण का जोखिम: पूर्व के विवादों और भाषणों के चलते अल्पसंख्यक मतों का लगभग शत-प्रतिशत उनके खिलाफ लामबंद होना।

अशरफ अली खान / विपक्ष (सपा / इंडिया) की ताकत और कमजोरियां

ताकत:

  • अशरफ अली की मिलनसार और सुलभ छवि: विवादों से दूर रहने वाले और हिंदू-मुस्लिम दोनों तबकों में सुख-दुख में शरीक होने वाले नेता के रूप में पहचान।

  • 1.2 लाख मुस्लिम और 45 हजार दलित मतों का सुरक्षा घेरा: यदि पीडीए समीकरण जमीन पर कायम रहता है, तो विपक्ष मजबूत स्थिति में रहता है।

  • कैराना सांसद इकरा हसन का जमीनी प्रभाव: इलाके में इकरा हसन की लोकप्रियता का सीधा चुनावी लाभ।

कमजोरियां:

  • रालोद के एनडीए में जाने से जाट मतों का खिसकना: 2022 में अशरफ अली रालोद के टिकट पर लड़े थे जिससे जाट वोट उनके साथ आया था; अब यदि वे सपा से लड़ते हैं तो जाट मतों को रोकना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

  • बसपा का रुख: यदि बसपा ने कोई मजबूत मुस्लिम प्रत्याशी उतारा, तो विपक्षी मतों के बंटवारे से सीधा नुकसान हो सकता है।

महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम (Timeline)

  • मार्च 2012: सुरेश राणा ने 265 वोटों के बेहद नजदीकी अंतर से चुनाव जीतकर भाजपा का परचम लहराया।

  • मार्च 2017: सुरेश राणा 16,817 वोटों से दोबारा जीते और उत्तर प्रदेश सरकार में गन्ना कैबिनेट मंत्री बने।

  • मार्च 2022: सपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशी अशरफ अली खान ने सुरेश राणा को 10,806 वोटों से हराकर सीट जीती।

  • फरवरी-मार्च 2024: राष्ट्रीय लोक दल औपचारिक रूप से एनडीए का हिस्सा बना; रालोद विधायकों ने एनडीए के पक्ष में मतदान किया।

  • जून 2024: कैराना लोकसभा सीट पर सपा प्रत्याशी इकरा हसन की जीत ने क्षेत्र में विपक्षी खेमे को नई ऊर्जा दी।

  • सितंबर 2026 (वर्तमान): 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर दलों द्वारा बूथ प्रबंधन और सांगठनिक समीक्षा तेज।

निष्कर्ष

बिंदास पोल की नज़र से ___

थानाभवन विधानसभा सीट 2027 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की उन सीटों में से एक है जहाँ का सियासी समीकरण 2022 के मुकाबले सबसे ज्यादा बदल चुका है

2022 में सुरेश राणा की हार का सबसे बड़ा कारण रालोद और सपा का एक होना तथा गन्ना भुगतान को लेकर किसानों का गुस्सा था। लेकिन 2027 में जब रालोद और भाजपा एक साथ मैदान में होंगे, तो जाट-ठाकुर-सैनी का सामाजिक गठबंधन भाजपा को कागजों पर बेहद मजबूत बनाता है।

अशरफ अली खान के लिए अपनी सीट बचाना तभी संभव होगा जब वे 2024 की तरह दलित मतों को पूरी तरह अपने साथ जोड़े रखें और रालोद से नाराज कुछ किसान मतों में सेंधमारी कर सकें। वर्तमान जमीनी हालात और नए गठबंधन को देखते हुए थानाभवन में मुकाबला बेहद कांटे का (50-50 Battle) है, जिसमें भाजपा-रालोद गठबंधन को हल्का सा मनोवैज्ञानिक लाभ मिलता दिख रहा है।

Live Poll: थानाभवन विधानसभा__

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब  (थानाभवन विधानसभा )

Q1. थानाभवन विधानसभा की क्रम संख्या क्या है?

उत्तर: उत्तर प्रदेश विधानसभा में थानाभवन निर्वाचन क्षेत्र की संख्या 09 है।

Q2. 2022 के विधानसभा चुनाव में थानाभवन से कौन जीता था?

उत्तर: 2022 के चुनाव में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के अशरफ अली खान ने जीत दर्ज की थी।

Q3. अशरफ अली खान ने पूर्व मंत्री सुरेश राणा को कितने वोटों से हराया था?

उत्तर: अशरफ अली खान ने भाजपा के पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा को 10,806 वोटों के अंतर से हराया था।

Q4. थानाभवन विधानसभा किस लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है?

उत्तर: यह विधानसभा क्षेत्र कैराना संसदीय सीट के अंतर्गत आता है, जहाँ से वर्तमान में सपा की इकरा हसन सांसद हैं।

Q5. थानाभवन के सबसे बड़े स्थानीय चुनावी मुद्दे क्या हैं?

उत्तर: बजाज चीनी मिल द्वारा गन्ने के बकाए भुगतान में देरी, थानाभवन-जलालाबाद संपर्क मार्गों की बदहाली, कस्बों में जलभराव और सरकारी कन्या डिग्री कॉलेज का अभाव मुख्य मुद्दे हैं।

🔗 इन्हें भी पढे:- 

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🗳️ Election Information & Official Voter Resources (नागरिक व मतदाता सेवाएं)

  • शामली जिले के प्रशासनिक विवरण, विधानसभा सीमाओं और स्थानीय जिला प्रशासन की जानकारी के लिए District Shamli Official Portal देखें।

  • आधिकारिक मतदाता सूची में नाम जांचने, नया वोटर आईडी कार्ड (Form 6) बनवाने या संशोधन के लिए Election Commission of India Citizen Portal का उपयोग करें।

  • राज्य निर्वाचन आयोग और स्थानीय निकाय चुनाव कार्यालयों के सत्यापन व आधिकारिक दिशा-निर्देशों के लिए Chief Electoral Officer (CEO) Uttar Pradesh के पोर्टल पर जाएं।

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