कासगंज की 3 सीटों पर 2027 का महासंग्राम: पटियाली में शाक्य-यादव तकरार, अमानपुर का राजपूत-लोध समीकरण और सदर का किला! जानिए कौन मारेगा बाज़ी ?
सोरों सूकरक्षेत्र की पावन धरा, गंगा का कटान और कासगंज की तीन सीटों का सियासी पारा ! तुलसीदास की कर्मभूमि सोरों सूकरक्षेत्र, भागीरथी गंगा की गोद और एटा से अलग होकर बने कासगंज (Kasganj) जिले की राजनीति हमेशा से अतरंगी और बेहद दिलचस्प रही है। एटा-कासगंज बेल्ट को पश्चिमी यूपी और ब्रज मंडल के मुहाने पर लोध, शाक्य, यादव, राजपूत (ठाकुर), मुस्लिम और ब्राह्मण राजनीति का सबसे बड़ा गढ़ माना जाता है। 2022 के विधानसभा चुनाव में कासगंज की तीनों सीटों— कासगंज सदर (213) , अमानपुर (214) और पटियाली (215) पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने परचम लहराया था। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद गंगा में काफी पानी बह चुका है। शाक्य और लोध वोट बैंक की लामबंदी और समाजवादी पार्टी के PDA कार्ड ने यहाँ 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात को बेहद पेचीदा बना दिया है। आइए, कासगंज की चौपालों से उठी ज़मीनी आवाज़ और तीनों सीटों का बेबाक विश्लेषण देखते हैं। 🔍 कासगंज की चौपालों से उठे 3 सबसे सुलगते ज़मीनी मुद्दे गंगा कटान व दियारा क्षेत्रों का स्थायी समाधान: पटियाली और कासगंज सदर बेल्ट के दर्जनों गांव हर साल गंगा की बाढ़ और ...