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सरधना : क्या संगीत सोम लेंगे 2022 की हार का बदला या अतुल प्रधान बचाएंगे लाल किला ?

बेगम समरू का ऐतिहासिक चर्च, गन्ने की लहलहाती फसलें और दो कट्टर प्रतिद्वंद्वियों की रंजिश: सरधना 2027 का सियासी महा-मुकाबला राम-राम और आदाब साथियों! बिंदास पोल (Bindaas Poll) की 45 वीआईपी हॉट सीट महा-पड़ताल में आज हम पहुंचे हैं मेरठ जिले के उस सबसे विस्फोटक और हाई-प्रोफाइल सियासी अखाड़े में, जिसकी चर्चा लखनऊ से लेकर दिल्ली के सत्ता गलियारों तक रहती है— सरधना विधानसभा (44) । सरधना की पहचान ऐतिहासिक रूप से बेगम समरू के चर्च और एशिया के गन्ने के सघन उत्पादन केंद्र के रूप में रही है। लेकिन पिछले डेढ़ दशक में यह सीट उत्तर प्रदेश की राजनीति में 'ठाकुर बनाम गुर्जर' और तीखे सांप्रदायिक व राजनीतिक ध्रुवीकरण की सबसे बड़ी प्रयोगशाला बन चुकी है। 2012 और 2017 में भाजपा के फायरब्रांड नेता ठाकुर संगीत सिंह सोम ने यहाँ से लगातार दो बार कमल खिलाया था। 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद संगीत सोम पश्चिमी यूपी में प्रखर हिंदुत्व के सबसे बड़े पैरोकार बनकर उभरे। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के छात्र नेता और पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष अतुल प्रधान ने दस साल के लंबे संघर्ष के बाद संगी...