आगरा ग्रामीण : क्या 'दलित राजधानी' में कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य बचा पाएंगी अपनी सीट या बसपा-सपा करेगी उलटफेर ?
ताज के साये में जूता कारीगरों की बस्तियां, जाटव समाज का सियासी मिजाज और पूर्व राज्यपाल का इम्तिहान: आगरा ग्रामीण 2027 का दंगल राम-राम और जय भीम साथियों! बिंदास पोल (Bindaas Poll) की 45 वीआईपी हॉट सीट महा-पड़ताल में आज हम पहुंचे हैं उस पावन धरती पर जिसे पूरे देश में 'उत्तर भारत की दलित राजधानी' कहा जाता है—आगरा जिले की सबसे हाई-प्रोफाइल आरक्षित सीट आगरा ग्रामीण विधानसभा (87) । आगरा की राजनीति हमेशा से बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के मजबूत आंदोलन और चमड़ा-जूता उद्योग से जुड़े लाखों कारीगरों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। 2008 के परिसीमन के बाद बनी इस सीट पर 2012 में बसपा के कालीचरण सुमन ने जीत दर्ज की थी। लेकिन 2017 में मोदी लहर के सवार होकर भाजपा की हेमलता दिवाकर ने यहाँ से 65 हजार वोटों के विशाल अंतर से कमल खिलाया। 2022 का विधानसभा चुनाव आगरा ग्रामीण के लिए सबसे बड़ा वीआईपी मुकाबला बन गया जब भाजपा ने उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल और आगरा की पूर्व मेयर बेबी रानी मौर्य को मैदान में उतारा। दलित (जाटव) समाज से आने वालीं बेबी रानी मौर्य ने राज्यपा...