🎙️ ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन: जौहर यूनिवर्सिटी की दीवारें, मुकदमों का जाल और रामपुर की 5 विधानसभा सीटों पर 2027 का सियासी घमासान! कोसी नदी के किनारे बसा, चाकू और हस्तशिल्प पैचवर्क की नक्काशी के लिए मशहूर रामपुर (Rampur) जिला उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक अलग ही धुरी पर घूमता है। कभी नवाबों की विरासत तो पिछले चार दशकों से समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता मोहम्मद आज़म खान का 'सियासी अभेद्य किला' रहा रामपुर आज भारी राजनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। मुस्लिम, तराई के सिख किसान, सैनी (ओबीसी), लोध-राजपूत, वैश्य और दलित (जाटव) समाज के ताने-बाने पर टिकने वाले इस जिले में हर गली और नुक्कड़ पर राजनीति सांस लेती है। 2022 के विधानसभा चुनाव में रामपुर सदर (37) से आज़म खान, उनके बेटे सुआर (34) से मोहम्मद अब्दुल्ला आज़म और चमरौआ (35) से नसीर अहमद खान ने जीतकर सपा की बादशाहत कायम रखी थी। वहीं बिलासपुर (36) से बलदेव सिंह औलख और मिलक सुरक्षित (38) सीट से राजबाला ने भाजपा की साख बचाई थी। लेकिन 2022 के बाद बदले घटनाक्रम, आज़म खान के परिवार पर दर्ज सैकड़ों कानूनी मुकदमों, अयोग्यता और मोहम्मद ...