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🗳️ हैदराबाद से यूपी तक ओवैसी का सफर: क्या AIMIM बनेगी तीसरा ध्रुव ?

चारमीनार की छांव से निकलकर रुहेलखंड और पूर्वांचल की गलियों तक: जब एक सांसद ने उत्तर प्रदेश की पारंपरिक 'वोट बैंक' राजनीति को सीधी चुनौती दी नमस्कार साथियों! बिंदास पोल (Bindaas Poll) की क्षेत्रीय दल महा-श्रृंखला में आपका स्वागत है। सुभासपा, अपना दल, रालोद, निषाद पार्टी और आज़ाद समाज पार्टी के बाद आज हम उस राजनीतिक दल का इतिहास और ज़मीनी हक़ीक़त टटोल रहे हैं जिसकी एंट्री ने उत्तर प्रदेश की सियासत में सबसे ज्यादा बहसों को जन्म दिया है— ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी । उत्तर प्रदेश में मुस्लिम आबादी लगभग 19% से 20% है। दशकों से यह माना जाता रहा कि यह वर्ग कांग्रेस, समाजवादी पार्टी या बहुजन समाज पार्टी के बीच ही अपनी चुनावी तकदीर तलाशता है। लेकिन 2014 के बाद हैदराबाद से चलकर उत्तर प्रदेश पहुंचे असदुद्दीन ओवैसी ने एक नया राजनीतिक विमर्श खड़ा किया: "आप कब तक दूसरों को जिताने के लिए वोट देंगे? अपना खुद का सियासी नेतृत्व कब खड़ा करेंगे?" क्या ओवैसी उत्तर प्रदेश में अपना मजबूत राजनीतिक आधार बनाने में सफल ...

🔥 MLC नतीजों से अखिलेश गदगद: क्या 2027 में चलेगा 'दो लड़कों' का मैजिक ?

वाराणसी और लखनऊ में लाल झंडा फहराने के बाद क्या 2027 में लखनऊ की गद्दी तक पहुंचेगी 'अखिलेश-राहुल' की जोड़ी? नमस्कार साथियों! बिंदास पोल (Bindaas Poll) के चुनावी विश्लेषण मंच पर आपका स्वागत है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद (MLC) की 11 शिक्षक और स्नातक सीटों के नतीजों ने 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात को पूरी तरह खोलकर रख दिया है। भारतीय जनता पार्टी के सबसे मजबूत बौद्धिक किलों— राजधानी लखनऊ और प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी खंड स्नातक —पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों ने जिस तरह से जीत दर्ज की है, उसने विपक्षी खेमे के आत्मविश्वास को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। 2024 के लोकसभा चुनाव में जब अखिलेश यादव के 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले और राहुल गांधी के 'संविधान बचाओ' अभियान ने मिलकर उत्तर प्रदेश में 43 सीटें जीतकर भाजपा को 33 सीटों पर समेट दिया था, तब विरोधियों ने इसे 'लोकसभा का तात्कालिक माहौल' बताया था। लेकिन अब विधान परिषद के स्नातक चुनावों में राज्य के सबसे पढ़े-लिखे शहरी वर्ग द्वारा सपा के पक्ष में मतदान करने से यह साफ हो गया ...