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सिद्धार्थनगर की 5 सीटों पर 2027 का नया चक्रव्यूह: देखिए सर्वे !

🎙️ तराई संवाद: बुद्ध भूमि का संदेश, सुगंधित काला नमक चावल का हुनर और सिद्धार्थनगर की 5 सीटों का सियासी तापमान! भगवान बुद्ध के बाल्यकाल की स्मृतियों को समेटे ऐतिहासिक कपिलवस्तु (पिपरहवा), अंतरराष्ट्रीय प्रसिद्धी प्राप्त 'काला नमक चावल' (Kalanamak Rice) की खुशबू और नेपाल सीमा से सटा सिद्धार्थनगर जिला बस्ती मंडल और पूर्वांचल की राजनीति में अपना विशेष स्थान रखता है। मुस्लिम, ब्राह्मण, कुर्मी (चौधरी), यादव, मौर्य/शाक्य, क्षत्रिय (ठाकुर) और दलित (जाटव/पासी) मतदाताओं का यह क्षेत्र हर चुनाव में बहुत कड़ा सामाजिक मुकाबला देखता है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सिद्धार्थनगर की 5 सीटों पर भाजपा-एनडीए और समाजवादी पार्टी के बीच बेहद तीखा और लगभग बराबर का मुकाबला देखने को मिला था। कपिलवस्तु आरक्षित (303) सीट से भाजपा के श्यामधनी राही, बंसी (304) सीट से पूर्व मंत्री जय प्रताप सिंह और शोहरतगढ़ (302) सीट से एनडीए सहयोगी अपना दल (एस) के विनय वर्मा ने जीत दर्ज कर 3 सीटों पर परचम लहराया था। वहीं इटवा (305) सीट से सपा के वरिष्ठ नेता व वर्तमान यूपी विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडे और डोमरियागंज...

खलीलाबाद से धनघटा तक किसका चलेगा जादू ? 2027 ओपिनियन पोल !

🎙️ पूर्वांचल ग्राउंड रिपोर्ट: सूफी संत कबीर की निर्वाण स्थली मघर, घाघरा-राप्ती का कटान और संत कबीर नगर की तीन सीटों का चुनावी समीकरण! महान सूफी संत कबीरदास की पावन तपोभूमि मघर, बखिरा पक्षी अभ्यारण्य और पीतल-बर्तन उद्योग के लिए मशहूर संत कबीर नगर (Sant Kabir Nagar) जिला पूर्वांचल की राजनीति में अपना खास वजूद रखता है। बस्ती मंडल का हिस्सा रहा यह जिला ब्राह्मण, मुस्लिम, निषाद/मल्लाह, यादव, वैश्य और दलित (जाटव/बेलदार) मतदाताओं के पेचीदा सामाजिक समीकरणों के लिए जाना जाता है। 2022 के विधानसभा चुनाव में संत कबीर नगर जिले की तीनों सीटों पर रोचक परिणाम देखने को मिले थे। खलीलाबाद (313) सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अंकुर राज तिवारी ने परचम लहराया, मेहदावल (312) सीट निषाद पार्टी (BJP गठबंधन) के अनिल कुमार त्रिपाठी के पाले में गई, तो वहीं धनघटा आरक्षित (314) सीट पर भाजपा के गणेश चंद्र ने जीत दर्ज की थी। 2024 के लोकसभा चुनावों में पूरे पूर्वांचल बेल्ट में समाजवादी पार्टी के 'PDA' कार्ड के चले जादू और पीस पार्टी/बसपा के मुस्लिम वोटों में बिखराव के बाद अब 2027 की लड़ाई बेहद आक्रामक ...