देवबंद : क्या 'ठाकुर दुर्ग' में बृजेश सिंह लगाएंगे जीत की हैट्रिक या मुस्लिम-दलित गठजोड़ करेगा खेल ?
दारुल उलूम की मीनारें, एटीएस कमांडो सेंटर और वेस्ट यूपी की सबसे संवेदनशील सियासी पिच: देवबंद 2027 का महा-संग्राम
राम-राम और आदाब दोस्तों! बिंदास पोल (Bindaas Poll) की 45 वीआईपी हॉट सीट महा-पड़ताल में आज हम पहुंचे हैं उस सरजमीं पर, जिसकी पहचान पूरी दुनिया में इस्लामिक तालीम के सबसे बड़े इदारे के रूप में है, लेकिन चुनावी सियासत में यह सीट भारतीय जनता पार्टी की सबसे मजबूत प्रयोगशाला बन चुकी है—सहारनपुर जिले की देवबंद विधानसभा (05)।
देवबंद का नाम आते ही जेहन में दारुल उलूम का अक्स उभरता है, लेकिन यहाँ की चुनावी हकीकत बेहद चौंकाने वाली है। 40% से अधिक मुस्लिम आबादी वाली इस सीट पर 2017 से लगातार भाजपा के कुंवर बृजेश सिंह रावत विधायक हैं और योगी सरकार में लोक निर्माण विभाग (PWD) के राज्यमंत्री रह चुके हैं।
2017 में जब सपा और बसपा ने अलग-अलग मुस्लिम प्रत्याशी उतारे, तो वोटों के बिखराव का फायदा उठाकर बृजेश सिंह 29 हजार से अधिक मतों से जीते थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा ने पूर्व विधायक माविया अली के बजाय कार्तिकेय राणा को उतारने की कोशिश की, लेकिन अंततः माजिद अली (बसपा) और सपा प्रत्याशी के बीच मुस्लिम मतों का ऐसा बंटवारा हुआ कि बृजेश सिंह ने सपा के कार्तिकेय राणा को 7,104 वोटों के अंतर से हराकर लगातार दूसरी बार कमल खिला दिया।
2024 लोकसभा चुनाव: इमरान मसूद की जीत के बाद बदला माहौल
2024 के लोकसभा चुनाव में जब सहारनपुर से कांग्रेस (इंडिया गठबंधन) के इमरान मसूद सांसद बने, तो देवबंद विधानसभा क्षेत्र में भी विपक्षी गठबंधन ने जबरदस्त बढ़त बनाई। देवबंद के मुस्लिम मोहल्लों और ग्रामीण दलित बस्तियों ने एकमुश्त वोट डालकर भाजपा को बैकफुट पर धकेला।
अब 2027 का विधानसभा चुनाव देवबंद के लिए अस्तित्व की जंग बन चुका है—क्या बृजेश सिंह हिंदू वोटों (ठाकुर, गुर्जर, ब्राह्मण, सैनी) को एकजुट रखकर जीत की हैट्रिक लगाएंगे, या मुस्लिम-दलित गोलबंदी इस बार भगवा किले को भेदने में सफल होगी?
📌 देवबंद विधानसभा एक नजर में __
सीट संख्या व नाम: 05 - देवबंद (सामान्य)
प्रशासनिक स्थिति: देवबंद तहसील, सहारनपुर जिला (सहारनपुर मंडल)
संसदीय क्षेत्र: सहारनपुर लोकसभा सीट (सांसद: इमरान मसूद - कांग्रेस)
कुल अनुमानित मतदाता: लगभग 3,55,000+
वर्तमान विधायक: कुंवर बृजेश सिंह रावत (भारतीय जनता पार्टी)
निकटतम प्रतिद्वंद्वी (2022): कार्तिकेय राणा (समाजवादी पार्टी)
प्रमुख इलाके व बाजार: देवबंद नगर, दारुल उलूम परिसर, रेलवे रोड, सांपला बेगमपुर, जड़ौदा पांडा, नागल कस्बा
प्रमुख पहचान: दारुल उलूम देवबंद, यूपी एटीएस (ATS) कमांडो सेंटर, देववृंद देवी मंदिर, त्रिवेणी शुगर मिल
2022 का चुनावी घमासान: जब वोटों के बिखराव ने खिलाया कमल
2022 के विधानसभा चुनाव में देवबंद सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला था। बसपा प्रत्याशी माजिद अली ने 54 हजार से अधिक वोट पाकर विपक्ष के वोटों में भारी सेंधमारी की थी।
| प्रत्याशी का नाम | राजनीतिक दल | प्राप्त कुल मत | मत प्रतिशत (%) | परिणाम / स्थिति |
| कुंवर बृजेश सिंह | भारतीय जनता पार्टी (BJP) | 93,890 | 39.13% | 7,104 वोटों से विजयी |
| कार्तिकेय राणा | समाजवादी पार्टी (SP) | 86,786 | 36.17% | दूसरे स्थान पर रहे |
| चौधरी माजिद अली | बहुजन समाज पार्टी (BSP) | 54,474 | 22.70% | तीसरे स्थान पर रहे |
| राहत खलील | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) | 2,121 | 0.88% | जमानत जब्त |
इस चुनाव का सबसे बड़ा विश्लेषण यह है कि यदि बसपा के माजिद अली को मिले 54 हजार वोटों का आधा हिस्सा भी सपा को मिल जाता, तो नतीजा पूरी तरह बदल सकता था। हिंदू वोटों का 80% एकतरफा ध्रुवीकरण बृजेश सिंह की जीत की ढाल बना।
📊 देवबंद का चुनावी इतिहास (2007 से 2024 तक)
| चुनाव वर्ष | चुनाव प्रकार | विजेता प्रत्याशी (दल) | उपविजेता (दल) | जीत-हार का अंतर | मुख्य चुनावी वजह व सियासी फैक्टर |
| 2007 | विधानसभा | मनोज चौधरी (बसपा) | शशि बाला पुंडीर (सपा) | 30,342 वोट | बसपा की सोशल इंजीनियरिंग और दलित-मुस्लिम-गुर्जर गठजोड़ की जीत। |
| 2012 | विधानसभा | राजेंद्र सिंह राणा (सपा) | मनोज चौधरी (बसपा) | 3,050 वोट | सपा की पूर्ण बहुमत लहर में राजेंद्र राणा ने बेहद करीबी अंतर से जीत दर्ज की। |
| 2016 (उपचुनाव) | विधानसभा | माविया अली (कांग्रेस) | रामपाल सिंह पुंडीर (सपा) | 3,559 वोट | राजेंद्र राणा के निधन के बाद मुस्लिम सहानुभूति से कांग्रेस जीती। |
| 2017 | विधानसभा | कुंवर बृजेश सिंह (भाजपा) | माजिद अली (बसपा) | 29,400 वोट | सपा-बसपा में मुस्लिम वोट बंटा; मोदी लहर में भाजपा की ऐतिहासिक जीत। |
| 2022 | विधानसभा | कुंवर बृजेश सिंह (भाजपा) | कार्तिकेय राणा (सपा) | 7,104 वोट | त्रिकोणीय मुकाबले में बसपा द्वारा 54K वोट काटने का भाजपा को लाभ। |
| 2024 | लोकसभा (देवबंद) | इमरान मसूद (कांग्रेस - इंडिया) | राघव लखनपाल (भाजपा) | इंडिया को 20K+ लीड | मुस्लिम-दलित मतों के एकतरफा ध्रुवीकरण से विपक्ष ने बड़ी बढ़त बनाई। |
2024 लोकसभा चुनाव: देवबंद विधानसभा ने क्या संदेश दिया?
2024 के लोकसभा चुनाव में देवबंद विधानसभा क्षेत्र के बूथवार आंकड़े भाजपा के लिए खतरे की घंटी साबित हुए।
सहारनपुर सीट से चुनाव लड़ रहे इमरान मसूद को देवबंद विधानसभा सेगमेंट से लगभग 20,500 वोटों की भारी बढ़त मिली। 2022 में जो मुस्लिम मतदाता बसपा के माजिद अली और सपा के बीच बंटा था, उसने 2024 में बसपा को पूरी तरह नकारते हुए एकमुश्त इंडिया गठबंधन को वोट दिया। दलित (जाटव) बस्तियों में भी संविधान के मुद्दे पर विपक्ष को मजबूत समर्थन मिला। इस रुझान ने साफ कर दिया कि 2027 में यदि मुस्लिम वोटों का बिखराव नहीं हुआ, तो भाजपा के लिए देवबंद बचाना आसान नहीं होगा।
जाति-बिरादरी का जमीनी ताना-बाना: किसका कितना जोर?
देवबंद विधानसभा क्षेत्र में लगभग 3.55 लाख मतदाता हैं। यहाँ की राजनीति पूरी तरह हिंदू-मुस्लिम जनसंख्या संतुलन और बिरादरीगत प्रभाव पर टिकी है:
मुस्लिम मतदाता: लगभग 1,25,000 - 1,30,000 मतदाता (कुल आबादी का करीब 36% से 38%। अंसारी, गाड़ा, कुरैशी, उस्मानी और शेख बिरादरी में बंटा यह वर्ग सीट का सबसे बड़ा वोट बैंक है)।
ठाकुर (राजपूत) समाज: लगभग 45,000 - 50,000 मतदाता (विधायक बृजेश सिंह का अपना सजातीय वर्ग, जो देहात के दर्जनों गांवों में बेहद रसूखदार और निर्णायक है)।
दलित समाज (जाटव / वाल्मीकि): लगभग 60,000 मतदाता (नागल और ग्रामीण इलाकों में फैला वर्ग, जो पहले बसपा का कोर था, अब इंडिया गठबंधन और चंद्रशेखर आजाद की ओर भी देख रहा है)।
गुर्जर समाज: लगभग 35,000 मतदाता (रालोद-भाजपा गठबंधन के चलते इनका बड़ा हिस्सा एनडीए के पक्ष में रहता है)।
सैनी समाज (ओबीसी): लगभग 25,000 मतदाता (भाजपा का पारंपरिक गैर-यादव पिछड़ा आधार)।
ब्राह्मण व वैश्य समाज: लगभग 30,000 मतदाता (देवबंद नगर और कस्बों में भाजपा के पक्के समर्थक)।
त्यागी, कश्यप व अन्य वर्ग: लगभग 30,000 मतदाता।
2027 के 4 सबसे बड़े जमीनी मुद्दे: देवबंद की जनता का सवाल
गन्ना मूल्य भुगतान और त्रिवेणी शुगर मिल: देवबंद क्षेत्र के किसानों का मुख्य सहारा गन्ना है। त्रिवेणी शुगर मिल से भुगतान में होने वाली देरी और पर्ची प्रणाली को लेकर किसानों में हर पेराई सत्र में असंतोष उभरता है।
एटीएस (ATS) सेंटर और सियासी ध्रुवीकरण: देवबंद में बने आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) के सेंटर को भाजपा जहाँ सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की उपलब्धि बताती है, वहीं विपक्षी दल इसे इलाके को बदनाम करने और ध्रुवीकरण का जरिया करार देते हैं।
देवबंद नगर में सीवर और जलभराव की समस्या: ऐतिहासिक देवबंद नगर के अंदरूनी बाजारों और रेलवे रोड पर जलनिकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। बरसात में मुख्य सड़कें तालाब बन जाती हैं।
नागल क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं और डिग्री कॉलेज का अभाव: नागल और देहात के इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं (सीएचसी/पीएचसी) में डॉक्टरों की कमी और बालिकाओं के लिए उच्च शिक्षा संस्थान न होना बड़ा चुनावी मुद्दा है।
कुंवर बृजेश सिंह रावत (BJP) की ताकत और कमजोरियां
ताकत:
प्रखर हिंदुत्व और मजबूत कानून-व्यवस्था का चेहरा: देवबंद में एटीएस सेंटर की स्थापना और अपराधियों पर सख्त कार्रवाई को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करने की क्षमता।
ठाकुर, सैनी, त्यागी और सवर्ण मतों का अटूट 1.3 लाख का ब्लॉक: भाजपा का समर्पित काडर और संगठन का मजबूत बूथ प्रबंधन।
योगी सरकार में पहुंच और निरंतर सक्रियता: क्षेत्र में विकास योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारने का ट्रैक रिकॉर्ड।
कमजोरियां:
लगातार 10 साल की एंटी-इनकंबेंसी: स्थानीय स्तर पर कुछ पुराने कार्यकर्ताओं में नाराजगी और ग्रामीण इलाकों में बुनियादी समस्याओं को लेकर उपजा असंतोष।
गुर्जर मतों में बिखराव: यदि विपक्ष किसी मजबूत गुर्जर चेहरे को मैदान में उतारता है, तो भाजपा के सामाजिक समीकरण में सेंध लग सकती है।
विपक्ष (सपा / इंडिया गठबंधन) की ताकत और कमजोरियां
ताकत:
इमरान मसूद और कार्तिकेय राणा का संयुक्त प्रभाव: 1.3 लाख मुस्लिम और करीब 40 हजार दलित मतों का प्राकृतिक गठजोड़, जो विपक्ष को 1.6 लाख से अधिक मतों का सीधा आधार देता है।
2024 लोकसभा चुनाव में 18K+ की लीड का हौसला: काडर में नया उत्साह और 2022 की मामूली हार का बदला लेने की लामबंदी।
कमजोरियां:
हिंदू मतों का जवाबी ध्रुवीकरण: देवबंद का इतिहास रहा है कि जब भी चुनाव मुस्लिम बनाम हिंदू के रूप में खिंचता है, तो गैर-मुस्लिम जातियां एकजुट होकर भाजपा के साथ खड़ी हो जाती हैं।
बसपा का रुख: यदि 2022 की तरह बसपा ने फिर कोई कद्दावर स्थानीय गुर्जर या मुस्लिम उम्मीदवार उतार दिया, तो विपक्षी मतों के बंटवारे का खतरा बना रहेगा।
बिंदास पोल की नज़र से __
देवबंद विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की राजनीति की सबसे तीखी वैचारिक पिच है। यहाँ विकास के दावों के समानांतर जातीय और धार्मिक लामबंदी हमेशा हावी रहती है।
बृजेश सिंह रावत के पास जहाँ मजबूत सवर्ण और गैर-यादव पिछड़ों का संगठित सुरक्षा कवच है, वहीं विपक्ष के पास 1.3 लाख से अधिक अल्पसंख्यकों और दलितों का मजबूत गणित है। 2024 के लोकसभा नतीजों ने साबित किया है कि अगर विपक्षी वोट बैंक एकजुट रहा, तो भाजपा के लिए 2022 का परिणाम दोहराना आसान नहीं होगा।
2027 का फैसला पूरी तरह इस बात पर टिकेगा कि 35 हजार गुर्जर मतदाता किसके साथ खड़े होते हैं और क्या बसपा दोबारा 30-40 हजार वोट काटकर खेल बिगाड़ती है। वर्तमान हालात में देवबंद में कांटे की टक्कर (50-50 Battle) है, जहाँ कुछ हजार वोटों का स्विंग किसी की भी किस्मत पलट सकता है।
Live Poll: देवबंद विधानसभा___
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल-जवाब (देवबंद विधानसभा)
Q1. देवबंद विधानसभा की क्रम संख्या क्या है?
उत्तर: उत्तर प्रदेश विधानसभा में देवबंद निर्वाचन क्षेत्र की संख्या 05 है।
Q2. 2022 के विधानसभा चुनाव में देवबंद से कौन जीता था?
उत्तर: 2022 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के कुंवर बृजेश सिंह रावत ने जीत दर्ज की थी।
Q3. बृजेश सिंह रावत ने सपा प्रत्याशी को कितने वोटों से हराया था?
उत्तर: बृजेश सिंह ने सपा के कार्तिकेय राणा को 7,104 वोटों के अंतर से हराया था।
Q4. देवबंद विधानसभा किस लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है?
उत्तर: यह विधानसभा क्षेत्र सहारनपुर संसदीय सीट के अंतर्गत आता है, जहाँ से वर्तमान में कांग्रेस के इमरान मसूद सांसद हैं।
Q5. 2024 लोकसभा चुनाव में देवबंद विधानसभा से किस गठबंधन को बढ़त मिली थी?
उत्तर: 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस-सपा (इंडिया गठबंधन) के इमरान मसूद ने देवबंद विधानसभा सेगमेंट से भाजपा पर लगभग 18,500 वोटों की बढ़त हासिल की थी।
Q6. देवबंद के मुख्य स्थानीय चुनावी मुद्दे क्या हैं?
उत्तर: भायला चीनी मिल का गन्ना भुगतान, देवबंद नगर में सीवर व जलभराव, देवबंद-रुड़की रेल ओवरब्रिज की मांग और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली मुख्य मुद्दे हैं।
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