घाघरा, गंगा और यमुना के कछार में 5% मतों की लामबंदी: क्या आरक्षण के अधूरे वादों के बीच 2027 में बरकरार रहेगा 'डॉक्टर साहब' का जलवा? नमस्कार साथियों! बिंदास पोल (Bindaas Poll) के विशेष चुनावी मंच पर आपका स्वागत है। निषाद पार्टी के भाग 1 (आंदोलन से 6 विधायकों तक का सफर) में हमने देखा कि कैसे डॉ. संजय निषाद ने गोरखपुर रेलवे ट्रैक के आंदोलन से शुरुआत करके अपने बेटे को सांसद बनाया और खुद योगी कैबिनेट में मत्स्य पालन मंत्री बने। आज इस भाग 2 (अंतिम भाग) में हम उन सवालों की पड़ताल करेंगे जो 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल की 25 से अधिक नदी-तटीय सीटों पर जीत-हार तय करेंगे: उत्तर प्रदेश में निषाद, केवट, बिंद, मल्लाह और कश्यप समाज का भौगोलिक फैलाव कहाँ-कहाँ है? मझवार (SC) आरक्षण का वह तकनीकी और कानूनी पेंच क्या है जिस पर निषाद समाज बार-बार लामबंद होता है? 2024 के लोकसभा चुनाव में संतकबीरनगर और भदोही में निषाद पार्टी को झटका क्यों लगा? 2027 के चुनाव में डॉ. संजय निषाद एनडीए से कितनी सीटों की मांग करेंगे और क्या पाला बदलने का विकल्प खुला है? 1. 5% निषाद-मल्लाह वोट बैंक:...