सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संसद में भगवा वेशधारी पप्पू यादव का हंगामा: राम मंदिर चढ़ावा विवाद

Pappu Yadav Bhagwa Sadhu Dress Sansad Ram Mandir Controversy


नमस्कार दोस्तों , जुलाई माह के आखिरी दिन पूर्णिया ,बिहार के सांसद श्री राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू यादव का इस तरह संसद भवन के बाहर साधू वेश में राम मंदिर में चोरी के मुद्दे पर प्रदर्शन को आप किस तरह से देखते है |
राजनीतिक पृष्ठभूमि:- राजेश रंजन (पप्पू यादव) बिहार की पूर्णिया सीट से 2024 में निर्दलीय चुनाव जीतकर सांसद बने हैं। वे इससे पहले भी कई बार सांसद रह चुके हैं और जन अधिकार पार्टी (JAP) के संस्थापक रहे हैं। वर्तमान में उन्होंने खुद को कांग्रेस पार्टी से जोड़ लिया है |

अपराधिक मामले और हलफनामा:--

  • चुनाव आयोग को दिए गए 2024 के चुनावी हलफनामे (Affidavit) के अनुसार, उन पर लगभग 40 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज/लंबित रहे हैं, जिनमें हत्या के प्रयास, सरकारी काम में बाधा, रंगदारी और आचार संहिता उल्लंघन जैसे मामले शामिल हैं।

  • (ध्यान दें: अजीत सरकार हत्याकांड मामले में सीबीआई कोर्ट द्वारा मिली सजा को पटना हाई कोर्ट ने रद्द कर उन्हें बरी कर दिया था।)



आप इस विरोध प्रदर्शन को किस तरह देखते है एक अपराधिक छवि के नेता द्वारा इसे करोड़ो हिन्दुओ के आस्था का अपमान मानते है या ये सोचते है की विरोध प्रदर्शन का ये बस एक तरीका है | अपनी राय हमे कमेंट बॉक्स में जरुर बताये साथ ही साथ पोल भी करे | आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों और सोशल मिडिया ग्रुप में शेयर करे ताकि अधिक से अधिक लोगो की राय पता चल सके |

टिप्पणियाँ

  1. ये sab राजनीति है जिसमे राम मंदिर का चंदा एक बनाबनाया मुद्दा है जो सरकार के ज्यादा खिलाफ जाती है

    जवाब देंहटाएं

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

🗳️ बस्ती विधानसभा चुनाव 2027: 5 सीटों पर किसका चलेगा दांव? जानिए जनमत पोल !

📌 बस्ती जिले का राजनैतिक मिजाज और जमीनी समीकरण__                      उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में स्थित बस्ती जिला राजनीति का एक बेहद अहम और संवेदनशील केंद्र है। कुआनो नदी के तट पर बसे इस जिले का चुनावी गणित जितना सीधा दिखता है, धरातल पर उतना ही पेचीदा है। बस्ती जिले में मुख्य रूप से कुर्मी (पटेल), ब्राह्मण, दलित, यादव और मुस्लिम मतदाताओं का भारी बाहुल्य है। यहाँ की राजनीति में पिछड़ों और सवर्णों की राजनैतिक गोलबंदी हमेशा से हार-जीत का मुख्य कारण बनती आई है। अगर पिछले इतिहास पर नज़र डालें, तो 2017 की प्रचंड मोदी लहर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहाँ क्लीन स्वीप करते हुए जिले की सभी 5 सीटों पर परचम लहराया था। लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में पासा पूरी तरह पलट गया। समाजवादी पार्टी (SP) ने अपने मजबूत गठबंधन और जमीनी मुद्दों के सहारे ज़बरदस्त वापसी की और 5 में से 4 सीटों पर कब्ज़ा जमाकर भाजपा को करारी शिकस्त दी। भाजपा सिर्फ हर्रैया सीट ही बचा सकी थी। 2027 का यह चुनाव भाजपा के लिए खोई हुई ज़मीन वापस पाने की अग्नि...

वाराणसी विधानसभा चुनाव 2027: 8 सीटों का चुनावी इतिहास, प्रमुख मुद्दे और जनमत पोल !

  📌 वाराणसी (काशी) का राजनीतिक इतिहास और महत्व ___ _ उत्तर प्रदेश की राजनीति में वाराणसी (Varanasi Political History) सिर्फ एक जिला नहीं, बल्कि देश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु है। भगवान शिव की नगरी काशी सांस्कृतिक रूप से जितनी समृद्ध है, राजनीतिक रूप से उतनी ही जागरूक भी रही है। वर्तमान में यह क्षेत्र इसलिए सबसे वीआईपी है क्योंकि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहाँ से सांसद हैं।  वाराणसी की धरती ने देश को महान नेता दिए हैं। राजनीतिक दृष्टिकोण से यहाँ व्यापारिक वर्ग, ब्राह्मण, भूमिहार, यादव, मौर्य, पटेल (कुर्मी) और मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा प्रभाव है। यहाँ की जनता का मूड पूरे पूर्वांचल (Eastern UP) की राजनीति की दिशा तय करता है। 🗳️ वाराणसी लोकसभा सीट: एक नज़र में (Varanasi Lok Sabha Equation)______ वाराणसी लोकसभा क्षेत्र (Varanasi Lok Sabha Seat) देश की सबसे चर्चित सीटों में से एक है। सांसद: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (BJP) चुनावी मिजाज: 2014 से लगातार यह सीट भारतीय जनता पार्टी का सबसे मजबूत गढ़ बनी हुई है। पीएम मोदी के यहाँ से चुनाव लड़ने के कारण वाराणसी में विकास...

सोनम वांगचुक, NTA, पेपर लीक और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर देश का सबसे बड़ा महा-सर्वे || 10 बड़े सवाल !

नई दिल्ली ग्राउंड रिपोर्ट:  -- दिल्ली का जंतर-मंतर इस समय देश के युवाओं, छात्रों और शिक्षाविदों के सबसे बड़े आंदोलन का केंद्र बन चुका है। सोनम वांगचुक का आमरण अनशन, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का रात भर का पहरा, NEET धांधली की गूंज और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग—इन सभी मुद्दों ने पूरे देश में एक बड़ी बहस छेड़ दी है। क्या सरकार छात्रों की आवाज़ दबा रही है? क्या NTA को बंद कर देना चाहिए? 2026-2027 के चुनावों में यह युवा वोट बैंक क्या गुल खिलाएगा? बिंदास पोल (Bindaas Poll) आपके लिए इस पूरे राष्ट्रीय मुद्दे से जुड़े 10 सबसे कड़क और बड़े सवाल एक ही पेज पर लेकर आया है। 👇 नीचे दिए गए सभी 10 महा-पोल्स पर अपनी बेबाक वोटिंग करें और अपनी भड़ास निकालें ! 📌 1. सोनम वांगचुक का अनशन और पुलिस कार्रवाई लद्दाख के समाजसेवी सोनम वांगचुक 21 दिन से पेपर लीक के खिलाफ अनशन पर थे, जिन्हें पुलिस ने जबरन अस्पताल पहुंचा दिया। Super Survey Maker 📌 2. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों का सीधा आरोप है कि इतनी परीक्षाओं में धांधली के बाद शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी ले...