अब तक नेता सोचते थे कि युवा सिर्फ हिंदू-मुस्लिम या जाति के नाम पर वोट दे देता है। लेकिन जंतर-मंतर पर उमड़ा जनसैलाब कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। देश में लगभग 35 से 40 करोड़ युवा मतदाता हैं। अगर ये युवा अपनी जाति और धर्म को भूलकर सिर्फ 'शिक्षा और रोजगार' के नाम पर एकजुट हो गए, तो दिल्ली से लेकर राज्यों की सत्ता हिल जाएगी। छात्र आंदोलन और चुनाव पर असर क्या ये देखने को मिलेगा ?
सोनम वांगचुक और CJP के आंदोलन ने युवाओं को एक धागे में पिरोने का काम किया है। क्या आपको लगता है कि आने वाले चुनावों में युवा अपनी पढ़ाई और पेपर लीक का बदला वोट की चोट से लेंगे? शिक्षा और रोजगार पर युवा मतदान का प्रभाव क्या होगा ?
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!! जय हिन्द !! सत्ता से संघर्ष नही समाधान चाहिए !! जय हिन्द !!
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