ASP और चंद्रशेखर आज़ाद का सियासी सफर: सहारनपुर के खूनी संघर्ष से नगीना में 1.51 लाख की जीत तक, जानिए कैसे हिली मायावती की जमीन ?
नीला गमछा, मूंछों पर ताव, संविधान की किताब और दलित युवाओं का आक्रामक तेवर: उत्तर प्रदेश में बहुजन सियासत की नई इबारत नमस्कार साथियों! बिंदास पोल (Bindaas Poll) की क्षेत्रीय दल महा-श्रृंखला में आपका स्वागत है। सुभासपा, रालोद और अपना दल की अंदरूनी पड़ताल के बाद आज हम उस राजनीतिक परिघटना का विश्लेषण कर रहे हैं जिसने पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली के सत्ता गलियारों तक हलचल मचा दी है— आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) और चंद्रशेखर आज़ाद । उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति पर पिछले साढ़े तीन दशकों से केवल एक ही नाम का एकछत्र प्रभाव रहा—बहन कुमारी मायावती और बहुजन समाज पार्टी (बसपा)। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में जब बसपा पूरे उत्तर प्रदेश में शून्य पर सिमट गई, तब पश्चिमी यूपी की सुरक्षित सीट नगीना (Nagina) से 37 वर्षीय एक युवा नेता ने बिना किसी बड़े दलीय गठबंधन के, सिर्फ अपनी साइकिल-केतली और युवाओं के दम पर 1.51 लाख वोटों की ऐतिहासिक जीत दर्ज करके संसद की सीढ़ियां चढ़ीं। सहारनपुर के एक छोटे से गांव घड़कौली से निकलकर देश की संसद तक पहुंचने वाले चंद्रशेखर आज़ाद का यह सफर केवल एक नेता के उभार की...