राम - राम दोस्तों , पहाड़ों का पानी, पहाड़ों की जवानी और यहाँ का स्वाद... तीनों का ही कोई मुकाबला नहीं है! 🏔️😋
देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति जितनी खूबसूरत है, यहाँ का खान-पान भी उतना ही लाजवाब है। लेकिन जब बात मीठे और त्योहारों की आती है, तो दो चीज़ों का नाम सबसे ऊपर आता है।
एक तरफ है कुमाऊं की शान 'बाल मिठाई', जो खोए और ऊपर से सजे सफेद दानों के साथ चॉकलेट जैसा स्वाद देती है और हर सैलानी की पहली पसंद होती है। दूसरी तरफ है गढ़वाल का पारंपरिक 'अर्सा', जो चावल के आटे और गुड़ से शुद्ध घी में बनता है और पहाड़ों में हर खुशी के मौके या शादी-ब्याह की जान होता है।
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पहाड़ की दो ऐतिहासिक मिठाइयां और उनकी खासियत
देवभूमि उत्तराखंड का खान-पान जितना सादा और शुद्ध है, उतना ही स्वादिष्ट भी है। जब भी उत्तराखंड की पारंपरिक मिठाइयों की बात आती है, तो बाल मिठाई और अरसा का नाम सबसे पहले लिया जाता है।
1. कुमाऊं की पहचान 'बाल मिठाई' (Bal Mithai): अलमोड़ा से शुरू हुई यह मिठाई भुने हुए मावे (खोया) से बनाई जाती है, जिसका स्वाद चॉकलेट जैसा होता है। इसके ऊपर चीनी के छोटे-छोटे सफेद दानों (दाना दाना) की कोटिंग की जाती है। उत्तराखंड आने वाला हर पर्यटक बाल मिठाई की मिठास का दीवाना हो जाता है।
2. गढ़वाल की जान 'अरसा' (Arsa): चावल के आटे, गुड़ और देसी घी से तैयार होने वाला अरसा गढ़वाल के हर शादी-ब्याह, त्योहार और मांगलिक कार्य की मुख्य पहचान है। इसे शुभ माना जाता है और शादी के बाद बेटियों को 'कलेवा' के रूप में दिया जाता है। इसका पारंपरिक स्वाद हर किसी की पुरानी यादें ताजा कर देता है।
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