इगास बग्वाल vs हरेला: देवभूमि उत्तराखंड का कौन सा पारंपरिक त्योहार है आपका सबसे फेवरेट? यहाँ लाइव वोट करें!

 नमस्कार देवभूमि उत्तराखंड के सभी प्रवासियों और पहाड़ के भाई-बहनों! 🏔️✨

हमारा उत्तराखंड अपनी अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपनी अनूठी लोक-संस्कृति और त्योहारों के लिए भी जाना जाता है। हमारे पहाड़ों में मनाए जाने वाले त्योहारों का सीधा संबंध प्रकृति, कृषि और हमारे इतिहास से है। आज 'बिंदास पोल' पर हम लेकर आए हैं देवभूमि की दो सबसे बड़ी लोक-परंपराओं का महा-मुकाबला!

एक तरफ है 'इगास बग्वाल' (Igas Bagwal), जिसे पहाड़ों की असली दिवाली या बूढ़ी दिवाली भी कहा जाता है। कार्तिक एकादशी के दिन मनाए जाने वाले इस त्योहार में भैलो खेलने की परंपरा, चीड़ की लकड़ियों की रोशनी और घर-घर में बनने वाले झंगोरे की खीर व स्वाले पूरे पहाड़ को जीवंत कर देते हैं। दूसरी तरफ है 'हरेला पर्व' (Harela), जो हरियाली, नई ऋतु के आगमन और प्रकृति के प्रति आभार जताने का त्योहार है। घर में हरेला बोना, बड़ों से आशीर्वाद लेना और पौधे लगाना हमारी इस पावन परंपरा का हिस्सा है।

भैलो की रौशनी वाली इगास या हरियाली का प्रतीक हरेला? आपके गांव की सबसे सुंदर याद किस त्योहार से जुड़ी है?

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