आज देश में शिक्षा एक सेवा नहीं, बल्कि अरबों-खरबों का धंधा बन चुकी है। सरकारी स्कूलों की हालत यह है कि कहीं छत टपक रही है तो कहीं मास्टर साहब नदारद हैं। मजबूरी में आम आदमी अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में डालता है, जहाँ एडमिशन फीस के नाम पर डाका डाला जाता है।
नर्सरी के बच्चे की फीस भी अब कॉलेज की फीस से ज्यादा हो चुकी है। और ऊपर से जब बच्चा बड़ा होकर कंपटीशन की तैयारी करता है, तो वहां पेपर लीक का सामना करना पड़ता है। क्या देश की शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से रीसेट करने का वक्त नहीं आ गया है?
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